काग भगोड़ा by Nidhi Singh, X B

नाम – काग भगोड़ा
लेखक- हरिशंकर परसाई
प्रकाशन- वाणी प्रकाशन

मानवीय संवेदनाओं में डूबे हुए हरिशंकर परसाई एक उच्च कोटि के व्यंग्यकार है। इनकी पुस्तक “काग भगोड़ा” राजनीति, साहित्य ,भ्रष्टाचार को व्यंग्य के माध्यम से हमारे सामने रखती है। परसाईं​ जी ने ‘इन्टरव्यू मुफतलाल कारण होना डिप्टी कलेक्टर में’ भ्रष्टाचार को बड़े ही कलात्मक ढंग से व्यंग्य के माध्यम से पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है कि कैसे देश के योग्य नौजवान नौकरी पाने से वंचित रह जाते हैं और एक अयोग्य व्यक्ति किस तरह अपनी उच्च लोगों से जान पहचान बताकर नौकरी हासिल कर लेता है। वहीं ‘एक तृप्त आदमी’ शीर्षक में एक संतुष्ट इंसान के लक्षणों को दर्शाया गया है और उसकी दिनचर्या का बखुबी लेखन माध्यम से चित्रण किया गया है।
व्यंग्यकार के रूप में लेखक अपना उत्तरदायित्व मानता है कि वह उन सब पर चोट करें जिन्हें वो गलत या बुरा मानता है। परसाईं जी उन लोगों को अपना नैतिक समर्थन​ देते हैं जो ईमानदार, नैतिक और रूढ़ विरोधी​है। ‘ साहब महत्वाकांक्षी ‘ और ‘ अनशनकारी’ जैसे शीर्षक में लेखक ने यह बताया है कि किस तरह लोग अपने फायदे के लिए दुसरो का इस्तेमाल करना चाहते हैं। आजकल बाजार में बिकने वाले ज्यादातर सामान का प्रचार नारियां ही करती हैं। इस पर व्यंग्य करते हुए लेखक ने कहा है कि, “ऐसा लगता है कि सारी अर्थव्यवस्था पर नारी सौंदर्य ने कब्जा कर रखा है।” शीर्षक ‘ सदाचार का ताबीज’ , ‘ एक फिल्म कथा’ तथा ‘ मुंडन’ में लेखक अपनी लेखन शैली से पाठकों को हंसने पर मजबूर कर देता है। फिल्मों में किस प्रकार अभिनेता को सर्वगुण संपन्न दिखाया जाता है और अंततः वह सारी परेशानियों और दुखों का अंत कर देता है। इस पर भी बड़ा रोमांचक व्यंग्य कसा गया है। मुंडन शीर्षक में भी किस​प्रकार सच को भी मंत्री संसद में सच नहीं साबित कर पाते और आपस में बहस करते हैं।इसको लेखक ने बड़े ही तार्किक शब्दों में व्यक्त किया है जो बड़ा ही हास्यास्पद है। वहीं अगले शीर्षक में लेखक थोड़ा मानवीय ढ़ंग से गम्भीर हो जाता है और आज के युवा किस तरह आधुनिकता​ कारण फैशन ओढ़े हुए हैं इस पर चर्चा करते हुए व्यंग्य कहता है। यह पुस्तक बहुत रोचक है।

नाम – निधि सिंह
कक्षा – १० – ब
अनुक्रमांक – १७

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