अलीबाबा और चालीस चोर by Anupam Yadav, VII B

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पुस्तक का नाम-अलीबाबा और चालीस चोर
पुस्तक नंबर-14003
पुस्तक का मूल्य-300.0
संकलन: गंगा प्रसाद शर्मा

 

यह किताब मुझे बहुत अच्छी लगी इस किताब में 7 कहानियां हैं जिसमें से पहली3 कहानियां यात्रियों की है पहली यात्री की कहानी यह है कि उसमें एक राजा रहता था जिसकी पहली पत्नी की कोई संतान नहीं था और वह दूसरी शादी कर लिया दूसरी पत्नी को एक संतान हुआ राजा को व्यापार के सिलसिले में विदेश जाना पड़ा जाते समय उसने अपनी पत्नी को सख्त हिदायत कि मेरे पीछे बच्चे और मां का पूरा ख्याल रखना किस्म की कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए मैं 1 साल के अंदर लौट आऊंगा मगर उसकी पत्नी ने उसकी दूसरी पत्नी को और उसके संतान को गाय और बछड़ा बना दिया जब राजा 1 साल बाद आया तब अपनी पत्नी से पूछा कि मेरी दूसरी पत्नी का है और लड़का पति पत्नी ने बोला कि आप की दूसरी पत्नी तो मर गए और लड़का 2 महीने पहले ही खेलते-खेलते कहीं गुम हो गया 8 महीने बाद ईद का त्यौहार आया उसकी इच्छा हुई कि वह पशु की कुर्बानी दी उसने ग्वाले को बुलाया और कुर्बानी के लिए एक मोटी ताजी का ले आया सहयोग से वह उसकी दूसरी पत्नी को लेकर आया जिसे पहली पत्नी ने उसे जो जादू टोना से गाया बना दिया था लेकिन राजा उसे देखकर उस पर तरस आ गई और उसने उसे मार नहीं पाया राजा ने कहा दूसरी का लेकर आओ लेकिन पहली पत्नी ने मना कर दिया तो राजा ने ग्वालियर से कालू तुम 182 ग्वालियर से कांपने लगा और राजा ने हुक्म दिया तुम काट दो और ग्वालियर ने काट दिया बाद में वाले की बहन को जादू टोना आता था उसने राजा को मिलकर बताया कि वह आपकी पत्नी थी और उसके साथ यहां पर जो बछड़ा है वह आपका लड़का है राजा ने कहा क्या तुम इसे ठीक कर सकती हो पत्नी ने कहा क्या तुम इसे ठीक कर सकती हो हां मैं इसे ठीक कर सकती हूं लड़की ने फिर बछड़े को उसका असली रूप लड़का बना दिया राजा ने कहा मेरी पहली पत्नी को दंड दे दो तो उस लड़की ने उसे गाय बना दिया और यहीं पर कहानी खत्म हो गई दूसरी यात्री की कहानी दूसरे आदमी के कहानी में तीन भाई रहते थे जिसमें पिछला वाला सबसे अच्छा आदमी था तीनों व्यापारी थे और अपना अपना व्यापार करते थे पहले भाई ने कहा कि मैं विदेश जा कर व्यापार करूंगा और वह विदेश चला गया और वह 1 साल बाद आया और अपने बीच ले भाई के पास गया उसने कहा कि विदेश में जाकर मेरा धंधा खराब हो गया है मुझे कुछ पैसे दे दो और मैं पढ़ कर के वहां से ज्यादा अच्छा कमा लूंगा तीसरे भाई ने कहा मैं विदेश जा कर कमा लूंगा तीसरे भाई विदेश चला गया कमाने के लिए वह अभी फिर 1 साल बाद वापस आया और विजय भाई क्या गया क्या कि वहां पर मेरे व्यापार को बहुत नुकसान हुआ मेरे पास एक भी पैसा नहीं है मुझे पैसे दे दो और उसके भाई ने उसे 3000 अशरफिया दे दी फिर दोनों भाई ने जीत की कि 20 ले भाई को कहा कि चलो तीनों लोग विदेश में जाकर व्यापार करते हैं बीच ले भाई ने कहा कि नहीं नहीं वहां पर बहुत घाटा हो जाएगा लेकिन दोनों भाई ने अपनी जीत नहीं मानी और दूसरे भाई ने कहा मैं ठीक है चलता हूं उसने अपने कुछ पैसे वहीं पर छोड़ दिए और कुछ पैसों से विदेश चला गया लेकिन वहां पर जाकर उसे बहुत घाटा हुआ और उसके भाइयों ने उसका पैसा लेकर घूम लोगे तभी उसको एक परी मिली और उसे सब कुछ बताया और उसने सजा दी अपने दोनों भाइयों को कि वह कुत्ते बन जाए और वह घर आकर जो पैसा वापस छोड़ा था उससे व्यापार कर लिया या अभी दूसरे यात्री की कहानी अब मैं आखरी कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसका शीर्षक है अलीबाबा चालीस चोर इस में दो भाई रहते थे और दोनों दोनों अलग-अलग घर में रहते थे और दोनों की शादी हो चुकी थी पहले भाई का नाम कासिम था और दूसरे भाई का नाम अलीबाबा था दूसरा भाई बहुत गरीब था और पहला भाई बहुत अमीर था गरीब भाई मेहनत मजदूरी से अपना पेट भरता था एक दिन वह जा रहा था तो देखा कि 40 गुणों से एक टीम आ रही है और WhatsApp गाड़ी है उसने देखा कि एक पत्थर के पास जाकर बोलता है कि खुल जा सिम-सिम और वह खुल जाता है पत्थर और वह अंदर जाकर बोलता है कि बंद हो जा सिम सिम और पत्थर बन जाता है फिर वह कुछ घंटो के बाद देखता है कि वहां से 40 घुड़सवार बाहर निकल कर चले जाते हैं वह डरते हुए जाता है और बोलता है खुल जा सिम सिम खुल दरवाजा खुल जाता है और उसमें देखता है बहुत से सोने चांदी रहते हैं और वह थोड़े से सोने चांदी उठाकर अपने घर ले जाता है और वह अपने जोड़ने के लिए तराजू अपने बड़े भाई से मांगता है तो उसकी पत्नी जान जाती है कि कुछ गड़बड़ लग रहा है उसने अपने तराजू के नीचे लगा रहता है और वह जब सोना आप जो करती है तब तक जाता है और वह तराजू दे आती है तब उसकी पत्नी देती है और उसकी पत्नी को मिल जाता है सोना और वह अपने पति से जाकर कहती है कि आपके छोटे भाई को कैसे सोना मिल गया है वह अपने छोटे भाई के पास जाता है और पूछता है धमकाता है तो उसके छोटे भाई उस गुफा के पास ले जाता है तो वह उसे दिखा बता देता है वह उसमे घुस जाता है छोटे भाई को बात कर और उसमें कसा सोना थोड़ा बहुत बार के घर ले जाता है तभी चालीस चोर आ जाते हैं और उसे देख जाते हैं और उसे पकड़ कर मार डालते हैं उसका छोटा भाई कैसे बिछड़ कर उसे घर ले गया और उसकी लाश को बीमार बताकर उस उसे दफन कर दिया 40 चोर जान गए थे कि उसका छोटा भाई भी यहां पर आया था और उसे मारने के लिए चोर बहुत सीटर की भी निकाल रहे थे लेकिन उस समय पत्नी ने उसे बचा लिया यह की आखिरी कहानी मुझे यकीन है कि आपको यह किताब मिलेगी तो आपको भी यह कहानी पसंद आएगी

 

नाम-अनुपम यादव
कक्षा-7ब

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Kendriya vidyalaya, Azamgarh was established in the year 1974. Classes for 10th started in the year 1979 and classes for 12th started in the year 1981 respectively. This Library blog has been started in 2014 and library automation also became functional powered by e-granthalaya software provided by NIC.
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